Late night thoughts

 ऐसी क्या गलती कर दी हमने की आपने रिश्ते नाते सब तोड़ ही दिए हमसे

एक मुद्दत हुई आपसे गुफ्तगू हुए
दो अपनी कहे, दो आपकी सुने हुए

क्या हम ही मानते थे तुझे अपना,
भर दी झोली तेरी खुशियों से 

दर्द तो बहुत हुआ इस लाल जोड़े में तुझे देख
तेरी आंखों में वही ख्वाब जीने की चाह 
बस किसी और के साथ देख कर
पर बस रोक आए खुदको उस दरख़्त से उतार लाए

वो आखिरी दिन भी यही चाहते रहे की 
काश......
आज भी यह एक लफ्ज़ कह दे

क्या दे ना पाए वो खुशी तुझे
क्या कमी खली जो हम भर न पाए
क्या इतना कमज़ोर था यह कमजर्ग आशिक तेरा
की एक बार पलट के देख भी न पाई

कितना कुछ था तुझे कहना
कितना था तेरे साथ लम्हों को जीना

क्या करें उन तमाम यादों का जो कैद हैं
इन आंखों में इस जहन में ऐसे

कैसे काटें यह रातें जो बस तुझे एकटक देखकर ही कट जाती थी
क्या अब वो गर्माहट की कमी तुझे नहीं खलती
अब कैसे आती है तुझे नींद बिना 
इस कंधे के 

आज भी राह तकता की शायद 
तू भी कभी उन सवालों के जवाब दे जाए
या अब अंत तक जीना होगा सब अनकही 
बातों यादों और आस के साथ

सोचते थे तुझे खुश देख कर 
हो जायेगा हमें भी एतबार
पर नही कर पाए खुद को रोक कर
होने से जार जार



Comments